Published on: 06 Oct 2026
इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर (रेवाड़ी) के वाणिज्य विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. संदीप पुरवा, शोध छात्रा सुप्रिया तथा होटल एवं पर्यटन प्रबंधन विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. पवन कुमार ने भूटान के पारो में 06 से 09 अक्टूबर 2026 के दौरान आयोजित 12वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन "हार्मोनइजिंग नेचर, इकॉनमी, एंड सोसाइटी: पाथवेज़ फॉर इंक्लूसिव एंड रेजिलिएंट डेवलपमेंट" के अंतर्गत 06 अक्टूबर 2026 को अपने महत्वपूर्ण शोध पत्र सफलतापूर्वक प्रस्तुत किए। इस अंतरराष्ट्रीय अकादमिक मंच पर दुनिया भर से आए प्रख्यात शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं और शोधकर्ताओं ने भाग लिया।अपने शोध में डॉ. संदीप पुरवा तथा सुप्रिया ने "पर्यावरणीय, सामाजिक और सुशासन रिपोर्टिंग: भारतीय परिदृश्य में एक दृष्टिकोण" विषय पर चर्चा की। इस अध्ययन के तहत बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की शीर्ष 30 कंपनियों तथा 13 विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों के आंकड़ों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया गया। सेबी के बिजनेस रिस्पांसिबिलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग ढांचे के तहत शीर्ष भारतीय कंपनियों में इस मानक का शत-प्रतिशत अनुपालन पाया गया। वन-वे एनोवा सांख्यिकीय परीक्षण के माध्यम से यह सिद्ध किया गया कि ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी, ऑटोमोबाइल और एफएमसीजी जैसे विभिन्न क्षेत्रों में इस रिपोर्टिंग की गहराई और गुणवत्ता अलग-अलग होती है। शोध पत्र में यह सिफारिश की गई कि इस रिपोर्टिंग को केवल सूचीबद्ध कंपनियों तक सीमित न रखकर बड़ी और मध्यम गैर-सूचीबद्ध कंपनियों पर भी अनिवार्य किया जाए; इसके अलावा, इस विषय को केवल चार्टर्ड अकाउंटेंसी, कंपनी सेक्रेटरीशिप और कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटेंसी जैसे पेशेवर पाठ्यक्रमों तक सीमित न रखकर अन्य सभी विषयों का भी हिस्सा बनाया जाए, तथा उच्च अनुपालन और उत्कृष्ट स्कोर प्राप्त करने वाली कंपनियों को कॉर्पोरेट कर में विशेष छूट दी जाए। इस पूरी उपलब्धि में इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग से सहायक प्रोफेसर डॉ. संदीप पुरवा और शोध छात्रा सुप्रिया द्वारा संयुक्त रूप से सहभागिता की गई, जिसे विश्वविद्यालय के नेतृत्व द्वारा सराहा गया।
इसी क्रम में, होटल एवं पर्यटन प्रबंधन विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. पवन कुमार ने अपने शोध में बताया कि 'अतिथि देवो भव' की सांस्कृतिक परंपरा और 'सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता' का दर्शन मिलकर टिकाऊ आतिथ्य प्रबंधन के लिए एक सशक्त ढांचा प्रदान करते हैं। यह अध्ययन दर्शाता है कि पारंपरिक मूल्यों को अपनाने से पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक कल्याण को बढ़ावा देना अधिक सहज होता है। जब होटल व्यवसाय वित्तीय लाभ के बजाय अतिथि सत्कार और सामाजिक समृद्धि को प्राथमिकता देता है, तो जिम्मेदार पर्यटन का विकास होता है, जिससे यह क्षेत्र आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय रूप से संतुलित बनता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली इस बड़ी अकादमिक उपलब्धि पर इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. असीम मिगलानी, कुलसचिव प्रो. दिलबाग सिंह, वाणिज्य एवं पर्यटन संकाय की डीन प्रो. अदिति शर्मा एवं वाणिज्य विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. रवींद्र ने सभी शोधकर्ताओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
कुलपति प्रो. असीम मिगलानी ने अपने बधाई संदेश में कहा कि "विश्वविद्यालय के शिक्षकों और शोधार्थियों का वैश्विक मंचों पर शोध पत्र प्रस्तुत करना संपूर्ण संस्थान के लिए गर्व का विषय है। पर्यावरण, सतत विकास और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े ऐसे उच्च स्तरीय शोध अकादमिक जगत को नई दिशा प्रदान करते हैं। हमारा उद्देश्य अपने शिक्षकों और शोधार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुसंधान के लिए लगातार प्रोत्साहित करना है, ताकि वे वैश्विक समस्याओं के समाधान में सक्रिय योगदान दे सकें।"
कुलसचिव प्रो. दिलबाग सिंह ने दोनों शोध दलों की सराहना करते हुए कहा कि "वैश्विक मंचों पर विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व होना हमारे लिए गर्व का विषय है, और ऐसे उच्च स्तरीय शोध संस्थान की अकादमिक प्रतिष्ठा को और सुदृढ़ करते हैं।"
संयुक्त रूप से बधाई देते हुए वाणिज्य एवं पर्यटन संकाय की डीन प्रो. अदिति शर्मा एवं वाणिज्य विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. रवींद्र ने कहा कि "यह हमारे संकायों और विभाग के लिए अत्यंत गौरवशाली क्षण है कि हमारे शिक्षक और शोधार्थी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सतत विकास, रिपोर्टिंग और आतिथ्य जैसे गंभीर विषयों पर अपने शोध का प्रभावी योगदान दे रहे हैं। हमारा विभाग हमेशा से गुणवत्तापूर्ण और नीति-निर्माता शोध कार्यों को प्रोत्साहन देता रहा है।"